
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के 22 जिलों के वकीलों ने एमएलसी चुनाव में सत्ताधारी दल भाजपा के प्रत्याशी का बहिष्कार कर दिया।
हाईकोर्ट बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चेयरमैन अनुज कुमार शर्मा और संयोजक परवेज आलम ने बताया कि लंबे समय से बेंच की मांग लंबित है, लेकिन सरकार इस पर कोई ठोस फैसला नहीं ले रही है। समिति ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द बेंच स्थापना की घोषणा नहीं की गई, तो आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए वकीलों ने ‘बेंच नहीं तो वोट नहीं’ का नारा दिया है। अधिवक्ताओं के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की मांग पिछले करीब 50 सालों से उठाई जा रही है। इस दौरान कई बार जनप्रतिनिधियों और सरकार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। संघर्ष समिति का आरोप है कि चुनाव के समय सभी दल हाईकोर्ट बेंच बनाने का वादा करते हैं, लेकिन जीतने के बाद इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
800 किमी दूर जाना पड़ता है प्रयागराज
वकीलों का कहना है कि पश्चिमी यूपी के लोगों को हाईकोर्ट में केस की पैरवी के लिए प्रयागराज (इलाहाबाद) जाना पड़ता है, जो करीब 700-800 किलोमीटर दूर है। इससे आम लोगों को समय और पैसे दोनों की भारी परेशानी उठानी पड़ती है। यदि पश्चिमी यूपी में ही बेंच स्थापित हो जाए तो लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय मिल सकेगा।
22 जिलों के वकीलों की होगी बैठक
समिति ने बताया कि इस मुद्दे पर जल्द ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के अधिवक्ताओं की बड़ी बैठक बुलाई जाएगी। समिति के पदाधिकारी लगातार सभी बार एसोसिएशनों से संपर्क कर भाजपा प्रत्याशी के बहिष्कार की अपील कर रहे हैं। समिति ने साफ कहा है कि जब तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


