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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में हस्तनिर्मित आभूषणों की दो दिवसीय प्रदर्शनी का सफल समापन

  • करीब एक हजार आगंतुकों ने किया अवलोकन, विद्यार्थियों ने दो दिनों में 37 हजार रुपये का कारोबार किया; अतिथियों ने की रचनात्मकता और उद्यमशीलता की सराहना

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी विभाग की ओर से 3 एवं 4 नवंबर 2026 को विद्यार्थियों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित आभूषणों की दो दिवसीय प्रदर्शनी का सफल आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा, कलात्मक कौशल, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच का शानदार प्रदर्शन किया।

खास बात यह रही कि प्रदर्शनी में रखे गए सभी आभूषण विद्यार्थियों ने स्वयं डिजाइन किए और विभिन्न प्रकार की कच्ची सामग्रियों से हाथों से तैयार किए। पारंपरिक भारतीय आभूषणों से लेकर आधुनिक फैशन ज्वेलरी और कस्टमाइज्ड डिजाइन तक की आकर्षक श्रृंखला ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।प्रदर्शनी का अवलोकन प्रो. बीरपाल सिंह, प्रो. भूपेंद्र सिंह, प्रो. अतवीर सिंह, प्रो. दिनेश कुमार, प्रो. नीरज सिंघल, इंजीनियर मनीष मिश्रा एवं प्रो. अलका तिवारी सहित अन्य अतिथियों ने किया। सभी ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए आभूषणों, उनकी कलात्मकता और आकर्षक प्रस्तुति की सराहना की।

इस अवसर पर निदेशक शोध प्रो. बीरपाल सिंह ने विद्यार्थियों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए उनके परिश्रम और रचनात्मकता की प्रशंसा की। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने कौशल को और निखारने तथा स्वयं के ज्वेलरी ब्रांड एवं कंपनियां स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आभूषण उद्योग में उपलब्ध संभावनाओं का उल्लेख करते हुए सेक्शन-8 के अंतर्गत मिलने वाले सहयोग और वित्तीय सहायता की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि उचित मार्गदर्शन, मेहनत और व्यावसायिक सोच के साथ विद्यार्थी अपने हुनर को सफल उद्यम में बदल सकते हैं।Dsw प्रो. भूपेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों के स्टॉलों की सजावट, उत्पादों की विविधता और उनकी प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कस्टमाइज्ड ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ रही है। ग्राहक अपनी पसंद, जरूरत और बजट के अनुसार आभूषण तैयार कराना चाहते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों के पास अपने डिजाइन बाजार में उतारने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के बेहतर अवसर हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को बाजार की मांग के अनुरूप नए उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।डीन आर्ट्स प्रो. अतवीर सिंह ने भी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान और तकनीकी कौशल को व्यावहारिक रूप देने का अवसर प्रदान करती हैं। ऐसे आयोजन उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और उद्यमशीलता की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इंजीनियर मनीष मिश्रा ने कॉस्ट्यूम और सिमुलेंट ज्वेलरी के बढ़ते बाजार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोने की कीमतों में वृद्धि के चलते ग्राहक अब अपने बजट के अनुरूप आकर्षक और किफायती आभूषणों के विकल्प भी तलाश रहे हैं। कॉस्ट्यूम ज्वेलरी इस जरूरत को पूरा करने का एक बेहतर विकल्प बन रही है। इसकी डिजाइन विविधता और कस्टमाइजेशन की सुविधा इसे बाजार में लोकप्रिय बना रही है। उन्होंने विद्यार्थियों के उत्पादों को वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप बताते हुए उनके व्यावसायिक विकास की संभावनाओं की सराहना की।दो दिन में एक हजार आगंतुक, 37 हजार रुपये का कारोबारप्रदर्शनी को आमजन का भी अच्छा प्रतिसाद मिला। दोनों दिनों में करीब एक हजार लोगों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

आगंतुकों ने विद्यार्थियों के उत्पादों की डिजाइन, गुणवत्ता, बारीकी और आकर्षक प्रस्तुति की सराहना की। विशेष रूप से विद्यार्थियों की ओर से प्रत्येक उत्पाद की लागत का आकलन, मूल्य निर्धारण और बाजार के अनुरूप कीमत तय करने की प्रक्रिया ने लोगों को प्रभावित किया। कई आगंतुकों ने अपनी पसंद के आभूषणों की खरीदारी भी की।प्रदर्शनी के दौरान विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से करीब 37 हजार रुपये का कारोबार किया। यह उपलब्धि विद्यार्थियों के लिए विशेष उत्साहवर्धक रही। उन्हें अपने डिजाइन किए गए उत्पाद सीधे ग्राहकों के सामने प्रस्तुत करने, उनकी पसंद और सुझाव समझने, लागत निर्धारित करने तथा वास्तविक बाजार में बिक्री का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

विभाग की समन्वयक प्रो. सरू कुमारी एवं सह-समन्वयक डॉ. अंशु अग्रवाल के मार्गदर्शन और विभागीय शिक्षकों के सहयोग से आयोजित इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों को अपने कौशल एवं उत्पादों को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर मिला। आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना तथा उन्हें स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों से परिचित कराना था।दो दिवसीय प्रदर्शनी विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और उद्यमशील सोच का प्रभावी उदाहरण बनी।

आयोजन ने यह संदेश दिया कि उचित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर विद्यार्थी अपनी कला एवं कौशल को सफल व्यवसाय और स्वयं के ब्रांड के रूप में विकसित कर सकते हैं।

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