HomeUncategorizedपीयर-टू-पीयर लर्निंग कार्यशाला के 14वें दिन विद्यार्थियों ने समझी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और...

पीयर-टू-पीयर लर्निंग कार्यशाला के 14वें दिन विद्यार्थियों ने समझी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन रोबोटिक्स की तकनीक

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटू राम इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCRIET) में आयोजित पीयर-टू-पीयर लर्निंग कार्यशाला के 14वें दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं ड्रोन रोबोटिक्स पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में इंजीनियर प्रवीण पंवार ने पहुंचकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक डॉ. शिवम गोयल भी उपस्थित रहे।कार्यशाला के दौरान वरिष्ठ छात्र रविंद्र मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से कंप्यूटर एवं मशीनों को मानव बुद्धिमत्ता की तरह सीखने, तर्क करने, विश्लेषण करने और निर्णय लेने में सक्षम बनाया जाता है।उन्होंने AI के विकास की यात्रा को समझाते हुए इसके प्रारंभिक नियम आधारित सिस्टम से लेकर मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग, आर्टिफिशियल न्यूरल नेटवर्क, एन्कोडर-डिकोडर आर्किटेक्चर और आधुनिक जनरेटिव AI तक के विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न प्रकार के एल्गोरिदम और न्यूरल नेटवर्क की कार्यप्रणाली को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। साथ ही बताया कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा, कृषि, शिक्षा, उद्योग, अंतरिक्ष विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने AI एवं कंप्यूटिंग के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिकों के योगदान का भी उल्लेख किया।

सत्र का विशेष आकर्षण ड्रोन रोबोटिक्स का व्यावहारिक प्रदर्शन रहा। रविंद्र मिश्रा ने विद्यार्थियों को एक ड्रोन रोबोट की संरचना, निर्माण प्रक्रिया और उसमें उपयोग होने वाले विभिन्न उपकरणों एवं इलेक्ट्रॉनिक घटकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने ड्रोन को खोलकर उसके अलग-अलग हिस्सों की कार्यप्रणाली समझाई तथा बताया कि मोटर, प्रोपेलर, फ्लाइट कंट्रोलर, बैटरी, सेंसर और अन्य घटक किस प्रकार आपस में समन्वय स्थापित करके ड्रोन को उड़ान और नियंत्रण प्रदान करते हैं।

इस अवसर पर इंजीनियर प्रवीण पंवार ने कहा कि इंजीनियरिंग केवल मशीनों और तकनीकों का अध्ययन नहीं, बल्कि विज्ञान के सिद्धांतों, गणितीय अवधारणाओं और नवाचार का उपयोग करके मानव जीवन एवं समाज के सामने उपस्थित वास्तविक समस्याओं के व्यावहारिक, प्रभावी और टिकाऊ समाधान विकसित करने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि पीयर-टू-पीयर लर्निंग विद्यार्थियों में तकनीकी ज्ञान के साथ नेतृत्व, संवाद कौशल, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने भविष्य की तकनीकों पर चर्चा करते हुए कहा कि आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोनॉमस सिस्टम, ड्रोन टेक्नोलॉजी और क्वांटम कंप्यूटिंग का होगा। रोबोटिक्स के माध्यम से ऐसे स्मार्ट सिस्टम विकसित होंगे जो जटिल कार्यों को स्वतः कर सकेंगे, वहीं क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य में दवा निर्माण, मटेरियल साइंस, जटिल गणनाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान के नए आयाम खोल सकती है। AI, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग का एकीकरण इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अभूतपूर्व संभावनाएं पैदा करेगा।

उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे केवल तकनीक का उपयोग करने तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं तकनीक विकसित करने, प्रयोग करने और समाज की समस्याओं के समाधान खोजने की दिशा में कार्य करें।कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने AI एवं ड्रोन निर्माण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे और व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। इस प्रकार कार्यशाला का 14वां दिन विद्यार्थियों के लिए तकनीकी ज्ञान, नवाचार और प्रयोगात्मक सीख का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। इस दौरान अनन्या,प्रखर इत्यादि छात्र छात्राएं मौजूद रहे

Share on Blogger
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Facebook Page

Most Popular

Recent Comments