HomeEvents"हुनर, नवाचार और आत्मनिर्भरता का उत्सव—'हुनर हाट' का भव्य समापन"

“हुनर, नवाचार और आत्मनिर्भरता का उत्सव—’हुनर हाट’ का भव्य समापन”

नित्य संदेश ब्यूरो

मेरठ। ललित कला संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय “हुनर हाट दीपावली मेले” का आयोजन चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में किया गया, जिसका आज उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में भव्य समापन हुआ। मेले का शुभारंभ कुलपति की प्रेरणा से हुआ था तथा समापन दिवस पर भी पूरे परिसर में दीपावली का उल्लास, भारतीय संस्कृति की झलक एवं विद्यार्थियों की रचनात्मक ऊर्जा देखने को मिली।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में मीना सिसोदिया प्रभारी अधीक्षिका, राजकीय दत्तक ग्रहण अभिकरण, सूरजकुंड रोड, मेरठ, समाज कल्याण विभाग रहीं तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में संजीव नगर, ऑफिस इंचार्ज, NITRA ITADC, मेरठ उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके उपरांत उन्होंने मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया तथा विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित लक्ष्मी-गणेश प्रतिमाएँ, बंदनवार, कमल पुष्प, रंगोली, पूजा थाल, वॉल हैंगिंग, हस्तनिर्मित आभूषण, गिफ्ट बॉक्स, बैग, टोकरियाँ एवं अन्य आकर्षक सजावटी उत्पादों की सराहना की। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों से खरीदारी कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि मीना सिसोदिया ने कहा कि “हुनर हाट जैसे आयोजन युवा प्रतिभाओं को अपनी कला के माध्यम से समाज से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने का सशक्त अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे आयोजन उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं।” विशिष्ट अतिथि संजीव नगर ने अपने उद्बोधन में कहा कि “ललित कला संस्थान द्वारा आयोजित यह ‘हुनर हाट दीपावली मेला’ विद्यार्थियों की सृजनात्मक क्षमता, नवाचार एवं उद्यमशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रोफेसर अलका तिवारी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने जिस उत्कृष्टता के साथ हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए हैं, वह अत्यंत सराहनीय है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी सोच विकसित करने के साथ-साथ भारतीय कला एवं हस्तशिल्प को नई पहचान भी प्रदान करते हैं।”

कार्यक्रम की संयोजिका एवं ललित कला संस्थान की उपनिदेशक प्रोफेसर अलका तिवारी ने बताया कि हुनर हाट दीपावली मेले का उद्देश्य विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा को समाज एवं बाजार से जोड़ना है, ताकि वे अपनी कला को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता का माध्यम बना सकें। उन्होंने बताया कि मेले में प्रदर्शित अधिकांश हस्तनिर्मित उत्पादों की आगंतुकों द्वारा उत्साहपूर्वक खरीदारी की गई, जिससे विद्यार्थियों का आत्मविश्वास और उत्साह दोनों ही बढ़ा है।

समापन समारोह को सफल बनाने में संस्थान के शिक्षकों डॉ. पूर्णिमा वशिष्ठ, डॉ. शालिनी धामा, सुश्री दीपांजली, मोहम्मद खालिद, सुश्री कृतिका, आकाश सहित सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा। साथ ही संस्थान के सभी छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह, समर्पण एवं अनुशासन के साथ बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई, जिससे यह आयोजन अत्यंत सफल एवं आकर्षक रहा।

कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर अलका तिवारी ने सभी विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक आयोजनों में और अधिक उत्साह एवं नवाचार के साथ सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों, आगंतुकों एवं विश्वविद्यालय परिवार के प्रति हार्दिक आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।

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