
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद शोध पीठ की ओर से भगिनी निवेदिता जी की 159वीं जयंती के उपलक्ष्य में ‘महिला सशक्तिकरण एवं विकसित भारत’ विषय पर नारा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने पोस्टर और प्रभावशाली नारों के माध्यम से महिला शिक्षा, लैंगिक समानता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी का संदेश दिया। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को महिला सशक्तिकरण के प्रति जागरूक करना तथा समाज और राष्ट्र के विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना था। महिला शिक्षा, सामाजिक उत्थान और राष्ट्रीय चेतना के क्षेत्र में भगिनी निवेदिता के योगदान से प्रेरित इस आयोजन में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए आकर्षक पोस्टरों के माध्यम से महिला अधिकारों, समान अवसरों और महिलाओं की नेतृत्व क्षमता से जुड़े विचार प्रस्तुत किए।
प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि विकसित भारत का सपना महिलाओं की समान भागीदारी, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सशक्त नेतृत्व के बिना पूरा नहीं हो सकता। प्रतिभागियों ने अपने नारों के जरिए समाज में महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का संदेश दिया।

कार्यक्रम का आयोजन प्रो. (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा, प्रोफेसर एवं संयोजिका, स्वामी विवेकानंद शोध पीठ के मार्गदर्शन एवं समन्वय में किया गया। निर्णायकों ने नारों की मौलिकता, रचनात्मकता, विषयानुकूलता, संदेश की स्पष्टता और प्रस्तुति के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया, प्रतियोगिता के परिणामों में नीलिमा राणा, सुकृति कुमारी एवं श्रुति राठौर ने संयुक्त रूप से प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं श्वेता शर्मा ने द्वितीय तथा माही चौहान ने तृतीय स्थान हासिल किया।
इस आयोजन ने विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, लैंगिक समानता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार करने का अवसर प्रदान किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि महिलाओं को शिक्षा, समान अवसर और नेतृत्व के लिए प्रोत्साहित करना केवल सामाजिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के समग्र विकास की अनिवार्य शर्त है। समग्र रूप से यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों में सामाजिक संवेदनशीलता, राष्ट्रीय चेतना और मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में स्वामी विवेकानंद शोध पीठ की एक सार्थक पहल रही।
आयोजन ने इस विचार को और मजबूत किया कि सशक्त, शिक्षित और आत्मनिर्भर महिलाएं ही समावेशी, प्रगतिशील एवं विकसित भारत के निर्माण की वास्तविक आधारशिला हैं।


