
नवीन मौर्य
नित्य संदेश, इंदौर। अपनी गौरवशाली शैक्षणिक विरासत और उत्कृष्ट शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान रखने वाला डेली कॉलेज, इंदौर, आधुनिक शिक्षा, शिक्षक विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में निरंतर नई पहल कर रहा है। इसी क्रम में विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती गुनमीत बिंद्रा की परिकल्पना, योजना एवं मार्गदर्शन में 30 अक्टूबर से 3 नवंबर तक पाँच दिवसीय विशेष कार्यशाला श्रृंखला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुरूप अधिक सक्षम, संवेदनशील और प्रभावी बनाना तथा विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके मानसिक, भावनात्मक और व्यक्तिगत विकास को भी सशक्त करना था।
देश के प्रतिष्ठित आवासीय शिक्षण संस्थानों में शामिल डेली कॉलेज की प्राचार्या श्रीमती गुनमीत बिंद्रा का मानना है कि शिक्षा की वास्तविक उत्कृष्टता केवल श्रेष्ठ शैक्षणिक परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए ऐसे शिक्षकों का होना भी आवश्यक है, जो विद्यार्थियों को समझें, उनका मार्गदर्शन करें और उन्हें जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करें। इसी व्यापक दृष्टिकोण के साथ उन्होंने इस कार्यशाला श्रृंखला की रूपरेखा तैयार की, जिसमें नेतृत्व क्षमता, कौशल आधारित शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, किशोरावस्था की चुनौतियों और भावनात्मक संवेदनशीलता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया।
कार्यशालाओं की शुरुआत 30 अक्टूबर को नेतृत्व विकास विषय पर आयोजित सत्र से हुई। इसका संचालन डेली कॉलेज के उन दो शिक्षकों ने किया, जिन्होंने दिल्ली में कैम्ब्रिज के प्राध्यापकों द्वारा आयोजित प्रशिक्षण में भाग लिया था। इस सत्र में नेतृत्व क्षमता, सामूहिक सहभागिता तथा शिक्षकों की भूमिका को एक मार्गदर्शक, प्रेरक और नेतृत्वकर्ता के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
31 अक्टूबर को सीबीएसई के विशेषज्ञ प्रशिक्षक द्वारा ‘कौशल बोध एवं कौशल विकास’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं सीबीएसई के नवीन पाठ्यक्रम के अनुरूप अनुभव आधारित शिक्षण, व्यावसायिक शिक्षा तथा विद्यार्थियों में व्यावहारिक जीवन कौशल विकसित करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
1 नवंबर को प्रसिद्ध काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट, पेरेंटिंग एक्सपर्ट एवं एजुकेशन कंसल्टेंट सुश्री सलोनी प्रिया ने ‘मनोवैज्ञानिक विकास एवं प्रसन्नता’ विषय पर शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य, सकारात्मक सोच तथा विद्यालयों में स्वस्थ और आनंददायी शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही ‘पास्टोरल केयर’ पर आयोजित विशेष सत्र में विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशीलता, भावनात्मक सहयोग और उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझने में शिक्षकों की भूमिका पर चर्चा की गई।
इसी क्रम में 2 नवंबर को सुश्री सलोनी प्रिया ने ‘किशोरावस्था की चुनौतियाँ : व्यवहार संबंधी समस्याएँ एवं आक्रामकता’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें किशोर विद्यार्थियों के व्यवहार को समझने, आक्रामक प्रवृत्तियों का संवेदनशीलता से समाधान करने तथा इस आयु वर्ग में उत्पन्न होने वाली भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया गया।
इसके अतिरिक्त 2 एवं 3 नवंबर को चयनित शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए ‘फाउंडेशन्स ऑफ कॉन्शस काउंसलिंग एंड टीचिंग (इनर चाइल्ड वर्कशॉप)’ विषय पर दो दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसका संचालन प्रसिद्ध लीडरशिप कोच, माइंडफुलनेस प्रशिक्षक एवं भावनात्मक विकास विशेषज्ञ श्री गणेश कोहली एवं डॉ. प्रीति कोहली ने किया।

इस कार्यशाला में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक व्यवहार, मानसिक संतुलन, सजग जीवनशैली तथा शिक्षण एवं परामर्श में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि शिक्षक स्वयं की भावनाओं और व्यवहार को बेहतर ढंग से समझकर विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बन सकते हैं। इससे शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच विश्वास, सहयोग एवं सकारात्मक संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है।
शिक्षकों का विकास ही विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला
इस विशेष पहल के पीछे प्राचार्या श्रीमती गुनमीत बिंद्रा का स्पष्ट शैक्षणिक दृष्टिकोण है कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण और उनकी भावनात्मक एवं व्यावसायिक दक्षता का विकास अत्यंत आवश्यक है। उनका विशेष जोर एक ऐसा विद्यालयीन वातावरण विकसित करने पर है, जहाँ शिक्षक केवल विषय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और विश्वसनीय सहयोगी भी बनें।
श्रीमती बिंद्रा के नेतृत्व में डेली कॉलेज अपनी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक शैक्षणिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए शिक्षक प्रशिक्षण, शिक्षा में नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को निरंतर प्राथमिकता दे रहा है। विद्यालय का उद्देश्य राष्ट्रीय एवं वैश्विक शिक्षा मानकों के अनुरूप उत्कृष्टता बनाए रखते हुए देश के स्कूली शिक्षा परिदृश्य में अपनी प्रतिष्ठित पहचान को और अधिक सुदृढ़ करना है।


