
नित्य संदेश ब्यूरो
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ एवं स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को स्वावलंबी भारत अभियान के अंतर्गत स्वदेशी उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन का आयोजन विश्वविद्यालय के अटल सभागार में किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता, स्वरोजगार, स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता तथा आत्मनिर्भर भारत की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल जी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन सभी अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात मां सरस्वती की वंदना एवं वंदे मातरम् का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो. आर.के. सोनी ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय कराया। उन्होंने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत 2047 तथा नवीन शोध के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए युवाओं को केवल पारंपरिक रोजगार के अवसरों तक सीमित न रहकर शोध, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को नए विचारों पर कार्य करने तथा अपने शोध को समाज और राष्ट्र के विकास से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य वक्ता एवं स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान के अखिल भारतीय संगठक श्री कश्मीरी लाल जी ने अपने संबोधन में बेरोजगारी के कारण युवाओं में उत्पन्न हो रहे अवसाद तथा रोजगार के वैकल्पिक अवसरों के रूप में उद्यमिता के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि युवाओं को नौकरी की प्रतीक्षा करने के साथ-साथ स्वयं के व्यवसाय एवं उद्यम स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए। उन्होंने राधेश्याम गोयनका एवं राधेश्याम अग्रवाल द्वारा एक कंपनी के अंतर्गत लगभग 320 स्वदेशी उत्पादों को विकसित करने का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्वदेशी उद्यमिता की संभावनाओं को रेखांकित किया।
उन्होंने व्यवसाय प्रारंभ करने के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देते हुए कई सफल उद्यमियों की प्रेरणादायक कहानियां साझा कीं। मीना बिंद्रा और उनके Biba ब्रांड का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि दृढ़ संकल्प, नवाचार और निरंतर प्रयासों के माध्यम से उद्यमिता के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने युवाओं से अपनी क्षमताओं को पहचानने, नए अवसरों का लाभ उठाने तथा रोजगार सृजनकर्ता बनने का आह्वान किया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवाओं एवं समाज के सभी वर्गों से राष्ट्र प्रथम की भावना को अपनाने और देश के विकास में अपना योगदान देने की अपील की।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने आज की पीढ़ी के साहस, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने युवाओं से चुनौतियों को अवसर में बदलने और अपनी प्रतिभा एवं क्षमता का सकारात्मक उपयोग करने का आह्वान किया। कुलपति ने वोकल फॉर लोकल की भावना को अपनाने तथा स्थानीय एवं स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया। उन्होंने हर घर स्वदेशी की भावना को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर देते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाकर और स्वदेशी उद्यमों को प्रोत्साहन देकर आत्मनिर्भर एवं सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
इस अवसर पर स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान की ओर से संयुक्त क्षेत्र संपर्क प्रमुख श्री विकास चौधरी, स्वदेशी जागरण मंच मेरठ प्रांत के सह प्रांत संयोजक श्री सुधांशु बिश्नोई, स्वावलंबी भारत अभियान के प्रांत सह समन्वयक श्री अनुज शर्मा एवं श्री बिजेंद्र उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से निदेशक शोध प्रो. बीरपाल सिंह, प्रो. अनिल मलिक, प्रो. नीरज सिंघल, डॉ. के.पी. सिंह, डॉ. स्वाति सिंह, डॉ. नाज़िया,डॉ. प्रियंका, डॉ. मनीषा, डॉ. मीनू, डॉ. विवेक त्यागी, डॉ. शिवम गोयल, डॉ. मोनिका, डॉ. निखिल, डॉ. अर्पित, डॉ. नीरज, डॉ. नैन्सी, डॉ. वेदवती , डॉ प्रियंक एवं श्री गुरप्रीत सिंह सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। सम्मेलन के माध्यम से स्वदेशी, स्वावलंबन एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा युवाओं को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया गया।


