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अयोध्या दीपोत्सव: आस्था, अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का पर्वोत्कर्ष

  • • सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’

उत्तर प्रदेश का अयोध्या दीपोत्सव आस्था, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ग्रामीण आजीविका का एक ऐसा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व महासंगम बन चुका है, जिसने पूरी दुनिया में भारत की प्राचीन चेतना, स्वावलंबन और आर्थिक समृद्धि का नया इतिहास रच दिया है। वर्ष 2017 से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरयू नदी के तट पर राम की पैड़ी पर नियमित रूप से आयोजित होने वाला यह भव्य दीपोत्सव हर साल अपनी भव्यता और नए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के माध्यम से त्रेतायुग के दृश्यों को धरातल पर जीवंत कर रहा है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व, पारदर्शी नीतियों और ग्रामोद्योग को मिले अभूतपूर्व संरक्षण के बल पर आज परंपरा और आधुनिक विकास का एक ऐसा विलक्षण समन्वय देखने को मिल रहा है, जिसने राज्य को बीमारू से बदलकर देश के सबसे प्रगतिशील राज्यों की श्रेणी में अग्रणी बना दिया है। इस वर्ष 2026 की यह दीपावली न केवल भव्यता और अलौकिक उल्लास का प्रतीक है, बल्कि यह जन-जन को आर्थिक संबल प्रदान करने वाले एक सशक्त स्थानीय मॉडल की भी साक्षात साक्षी बन गई है।

इस वृहद आयोजन का सबसे बड़ा और प्रेरणादायक पहलू इसकी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कुटीर उद्योगों से जुड़ी सफलता है। सरयू के तट पर जलने वाला प्रत्येक मिट्टी का दीया आज प्रदेश के लाखों गरीब प्रजापतियों, कुम्हारों और माटी कला के कारीगरों के घरों में रोशनी और आजीविका का साधन बन रहा है। दीयों के इस विशाल निर्माण के लिए अयोध्या, अवध और आसपास के जिलों के हजारों कुम्हार परिवारों को महीनों पहले बड़े पैमाने पर आर्डर दिए जाते हैं, जिससे उन्हें सरकार द्वारा प्रत्यक्ष आर्थिक संबल मिलता है। इसके साथ ही, महिला स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी ने महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी है।

दीयों में बाती लगाने, तेल भरने, सजावट करने और दीपोत्सव के संपूर्ण प्रबंधन में हजारों महिलाओं का श्रम जुड़ा हुआ है, जिससे उनकी आय में कई गुना वृद्धि हुई है। पर्यटन की इस अभूतपूर्व वृद्धि से स्थानीय होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, गाइड, परिवहन, और हस्तशिल्प के छोटे-बड़े व्यापारियों के व्यवसाय को भारी गति मिली है, जिससे आस्था का यह महान उत्सव आज प्रदेश के आर्थिक विकास का एक सशक्त इंजन बन चुका है।

योगी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन को प्रभावी ढंग से रोकने और युवाओं को अपनी ही माटी में स्वरोजगार के सुअवसर उपलब्ध कराने के लिए कई क्रांतिकारी योजनाएं धरातल पर उतारी हैं। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना और पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत विशेष अभियान चलाए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं और पारंपरिक कारीगरों को खुद का उद्योग स्थापित करने के लिए वित्तीय संबल दिया जा रहा है।

सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की स्थापना के जरिए हजारों युवाओं को सीधा स्वरोजगार देने का लक्ष्य सफलता के साथ साकार किया है। इन कुटीर उद्योगों को वित्तीय मजबूती देने के लिए बैंकों के माध्यम से 40 करोड़ रुपये से अधिक का आसान ऋण और भारी ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया गया है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी एक जिला एक उत्पाद योजना और विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों, बुनकरों और शिल्पकारों को आधुनिक टूलकिट, निशुल्क कौशल प्रशिक्षण और वित्तीय प्रोत्साहन देकर उनके हुनर को सीधे वैश्विक और स्थानीय बाजार से जोड़ा गया है, जिससे दीपावली के इस पर्व पर खादी, माटी कला और स्थानीय हस्तशिल्प की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है।

अयोध्या के भव्य राम मंदिर के निर्माण और विश्वस्तरीय पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास ने उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक पर्यटन की एक अभूतपूर्व क्रांति ला दी है, जिससे देश-विदेश से आने वाले लाखों-करोड़ों पर्यटकों और श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इस वर्ष दीपोत्सव के पावन अवसर पर राज्य सरकार ने गरीबों के जीवन में और अधिक उल्लास भरने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 1.89 करोड़ से अधिक पात्र परिवारों को रसोई गैस सिलेंडर रिफिल की सब्सिडी के लिए 1,500 करोड़ रुपये की बड़ी सौगात दी है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का यह पर्व बिना किसी आर्थिक बाधा के संपन्न हो सके।


अयोध्या का यह दीपोत्सव अब केवल एक धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव का पर्व ही नहीं रह गया है, बल्कि यह वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को जमीन पर उतारने का एक जीवंत प्रमाण बन गया है। योगी सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि संस्कृति जब विकास और रोजगार का आधार बनती है, तो समाज के हर वर्ग तक समृद्धि स्वतः पहुंचती है और जब प्राचीन सांस्कृतिक आस्था को आधुनिक अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्वावलंबन का संबल मिलता है, तब यही संगम प्रत्येक नागरिक के जीवन में आत्मनिर्भरता का नया सवेरा लेकर आता है और यही समग्र विकास का वास्तविक पर्वोत्कर्ष है।

लेखक —नित्य संदेश की समाचार संपादक हैं।

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